प्रतिभूतियाँ जारी करने का वैध तरीका तय करें
भारत में इक्विटी क्राउडफंडिंग स्वामित्व या प्रतिभूति संबंधी अधिकार देती है, इसलिए जारीकर्ता की कानूनी संरचना और धन जुटाने का तरीका महत्वपूर्ण हैं। कोई कंपनी खुले ऑनलाइन आमंत्रण को केवल निजी नियोजन कहकर निजी नियोजन नहीं बना सकती। कंपनी अधिनियम की धारा 42 पहचाने गए व्यक्तियों को प्रस्ताव देने और निजी नियोजन के सार्वजनिक प्रचार पर प्रतिबंध से संबंधित है। प्रस्ताव प्रसारित करने से पहले कंपनी को लागू स्वीकृतियों, सूचनाओं, सदस्यता दस्तावेज़ों और दाखिलों पर सलाह चाहिए। भागीदारी को मुशारका या लाभ का बँटवारा कहने से वित्तीय साधन की वास्तविक प्रकृति के कारण उत्पन्न दायित्व समाप्त नहीं होते।
मंच और निवेशक के अधिकारों का आकलन करें
SEBI की जून 2026 की चेतावनी अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक मंचों पर गैर-सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों की प्रतिभूतियों का लेनदेन करने के जोखिम दोहराती है। ऐसे लेनदेन में एक्सचेंज की निवेशक सुरक्षा और शिकायत समाधान व्यवस्था उपलब्ध नहीं होती। जाँचें कि शेयरों का मालिक कौन है, आवंटन का प्रमाण कैसे मिलता है, मतदान और जानकारी पाने के कौन-से अधिकार हैं तथा बाहर निकलने का व्यावहारिक तरीका मौजूद है या नहीं। कंपनी पंजीकरण, आकर्षक निवेशक डैशबोर्ड या शरीअत संबंधी राय का दावा आवश्यक प्रतिभूति-कानून ढाँचे का विकल्प नहीं है। धन लगाने से पहले स्वतंत्र कानूनी और वित्तीय समीक्षा कराएँ, विशेषकर जब आसान पुनर्बिक्री, निश्चित प्रतिफल या पूँजी की गारंटी का वादा किया जाए।
