अनियमित आय के समय भी चलने वाली योजना बनाएँ
उत्तराखंड का कोई परिवार छोटा सेवा व्यवसाय शुरू करना चाहे तो उसकी आय वर्षभर समान न हो सकती है। इसलिए उचित वित्तपोषण अनुमान में जरूरी घरेलू खर्च, कारोबार के धीमे महीने और खरीदे गए औजारों के रख-रखाव की लागत शामिल होनी चाहिए। रिश्तेदार क़र्ज़-ए-हसन दें तो मूलधन की वापसी की तारीख और वास्तविक भुगतान कठिनाई पर बातचीत की प्रक्रिया लिखें। राज्य की आधिकारिक अल्पसंख्यक कल्याण वेबसाइट अल्पसंख्यक कल्याण और वक्फ विकास निगम को NMDFC की राज्य माध्यम एजेंसी बताती है। संस्था के नाम में वक्फ होने से उसकी प्रत्येक वित्त योजना धर्मार्थ वक्फ या ब्याज-मुक्त ऋण प्रमाणित नहीं हो जाती।
पढ़ाई की सहायता और व्यवसाय का उधार अलग रखें
उत्तराखंड की प्रकाशित योजना निर्देशिका में छात्रवृत्ति कार्यक्रम भी हैं, जिनकी अपनी पात्रता, दस्तावेज और आवेदन व्यवस्था होती है। व्यवसाय वित्त के अनुरोध में पढ़ाई की लागत जोड़ने से पहले परिवार को शिक्षा सहायता की उपलब्धता पता करनी चाहिए। धर्मार्थ अभियान में बची हुई जरूरत बताएँ और समझाएँ कि बाद में छात्रवृत्ति या दूसरी सहायता मिलने से लक्ष्य कैसे बदलेगा। लागू सरकारी योजना की सूचना और ऋण की लिखित शर्तें सीधे प्राप्त करें, जिनमें ब्याज या अनिवार्य योगदान भी शामिल हों। यह न मानें कि कल्याण कार्यालय, निजी अभियान और शरीअत समीक्षक एक ही काम करते हैं।
